बुद्ध पूर्णिमा पर देशभर के आश्रमों में गूँजा मानव धर्म शास्त्र का पाठ


कोलकाता: बुद्ध पूर्णिमा के पावन और मांगलिक अवसर पर देश के विभिन्न कोनों में श्रद्धा और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। अवधूत देवीदास सेवा संस्थान द्वारा आयोजित ‘मानव धर्म शास्त्र’ के सामूहिक पाठ ने श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और सेवा के संकल्प से सराबोर कर दिया।संस्थान द्वारा पिछले तीन वर्षों से जारी इस अनूठी परंपरा के तहत इस बार भी भव्य आयोजन किए गए। मुख्य रूप से कोलकाता एवं वाराणसी गंगा के तटों पर स्थित केंद्रों में भक्तों की भारी भीड़ रही।वही राजस्थान के नारायणी धाम अरावली की वादियों में स्थित इस पावन धाम में पाठ की गूँज भी सुनाई दी।साथ ही बहादुरपुर आश्रम यहाँ भी स्थानीय श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सामूहिक अनुष्ठान में भाग लिया।परम पूज्य गुरुदेव अवधूत लक्ष्मीनारायण जी द्वारा रचित यह ग्रंथ मात्र अक्षरों का समूह नहीं, बल्कि आधुनिक युग के लिए एक संपूर्ण जीवन-दर्शन है। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक पाठ के साथ-साथ हृदयस्पर्शी भजन-सत्संग और गहन ध्यान साधना का भी आयोजन हुआ। संस्थान के प्रतिनिधि के अनुसार, यह ग्रंथ एकता, सत्य, करुणा और निस्वार्थ सेवा जैसे सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।अवधूत देवीदास सेवा संस्थान केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्थान द्वारा निरंतर संचालित सेवा कार्य इसकी पहचान बन चुके हैं.चाहे जरूरतमंदों के लिए चिकित्सा शिविर हो या गरीब बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए सहायता,या कहे सामूहिक विवाह सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने हेतु।इसके अलवा महाकुंभ एवं गंगा सागर जैसे बड़े आयोजनों में श्रद्धालुओं के लिए निःस्वार्थ सेवा शिविर।कार्यक्रम का समापन 'सतगुरु' के आशीर्वाद और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने न केवल पाठ का श्रवण किया, बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में सदाचार और मानव सेवा को उतारने का दृढ़ संकल्प भी लिया। बुद्ध पूर्णिमा के इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में 'मानव धर्म शास्त्र' जैसे ग्रंथ ही समाज को नैतिक और आध्यात्मिक संबल प्रदान कर सकते हैं।जहाँ सेवा है, वहीं सत्य है और जहाँ सत्य है, वहीं धर्म है।
Click Here to Visit
What's Your Reaction?